जातिगत जनगणना की मांग पर एकजुट विपक्ष, कांग्रेस अध्यक्ष ने मोदी को लिखा पत्र

देश की राजनीति में इस समय जातिगत जनगणना (Caste Census) का मुद्दा छाया हुआ है। कांग्रेस, जदयू, राजद, एनसीपी, द्रमुक और आम आदमी पार्टी समेत कई विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार से जाति आधारित जनगणना कराने की मांग की है। कोविड-19 महामारी के कारण नियमित जनगणना में देरी होने के कारण जातिगत जनगणना की नए सिरे से मांग की जा रही है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अपनी कर्नाटक रैलियों में दो दिनों में दूसरी बार जातिगत जनगणना की मांग की है।
क्या है जातिगत जनगणना
जातिगत जनगणना का अर्थ है जनगणना की कवायद में भारत की जनसंख्या का जातिवार सारणीकरण शामिल करना। भारत ने केवल अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के – 1951 से 2011 तक – जातिगत आंकड़ों को गिना और प्रकाशित किया है। यह धर्मों, भाषाओं और सामाजिक-आर्थिक स्थिति से संबंधित डेटा भी प्रकाशित करता है।
राहुल गांधी ने आरक्षण पर 50 प्रतिशत की सीमा को हटाने की मांग करते हुए पीएम मोदी को 2011 की जाति आधारित जनगणना के आंकड़ों को सार्वजनिक डोमेन में जारी करने की चुनौती दी है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने पीएम मोदी को पत्र लिखकर ‘तुरंत’ जनगणना कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि इससे सामाजिक न्याय और सशक्तिकरण को मजबूती मिलेगी।
पिछले हफ्ते तमिलनाडु की एमके स्टालिन सरकार ने भी राज्य विधानसभा में केंद्र से दशकीय जनगणना के साथ-साथ एक व्यापक जातिगत जनगणना कराने का आग्रह किया था। महाराष्ट्र विधानसभा में विपक्ष के नेता अजीत पवार ने फरवरी में मांग की थी कि भाजपा-शिवसेना सरकार को बिहार जैसा जाति आधारित सर्वे कराना चाहिए। पिछले साल एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार ने भी सामाजिक समानता सुनिश्चित करने के लिए इसे एक आवश्यकता बताते हुए जाति आधारित जनगणना की मांग की थी।