दिल्ली विधानसभा चुनाव में बस मार्शलों ने ठोकी ताल, 6 उम्मीदवारों के नाम घोषित

राजधानी दिल्ली की सड़कों पर यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने वाले बस मार्शल अब विधानसभा चुनावी मैदान में उतर चुके हैं। दिल्ली बस मार्शल एसोसिएशन ने अपने छह उम्मीदवारों के नामों की घोषणा भी कर दी है, जो विधानसभा चुनावों में हिस्सा लेंगे । ये बस मार्शल दिल्ली में विकास की गंगा बहाने और महिला सुरक्षा जैसे तमाम मुद्दे को लेकर चुनावी मैदान में ताल ठोक रहे है।
कौन हैं बस मार्शल?
दिल्ली में महिलाओं की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए, साल 2019 में बतौर मुख्यमंत्री रहते अरविंद केजरीवाल ने बसों में मार्शलों को तैनात किया था । ये मार्शल दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) और क्लस्टर बसों में तैनात होते थे और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करते थे । इनका मुख्य उद्देश्य महिलाओं के प्रति किसी भी प्रकार की असुरक्षा को दूर करना और उन्हें आत्मविश्वास के साथ सफर करने का माहौल प्रदान करना होता था।
बस मार्शलों ने चुनाव लड़ने का निर्णय क्यों लिया?
बस मार्शल एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेश कुमार का कहना है कि मार्शल न केवल दिल्ली की बसों में सुरक्षा का प्रतीक रहा, बल्कि वे समाज की जरूरतों को भी बेहतर तरीके से समझते हैं। उन्होंने कहा, “बस में हर दिन हजारों लोगों से मिलते हुए, हमें उनके संघर्ष और समस्याओं का गहरा एहसास है। हमें महसूस हुआ कि हम सिर्फ सुरक्षा तक सीमित न रहकर, समाज की अन्य जरूरतों के लिए भी काम कर सकते हैं। इसी सोच के साथ हमने चुनाव लड़ने का फैसला किया।
इन 6 उम्मीदवारों के नाम हुए घोषित
बस मार्शल एसोसिएशन ने दिल्ली के छह विधानसभा क्षेत्रों से अपने उम्मीदवारों के नामों की घोषणा कर दी है। ये सभी उम्मीदवार लंबे समय से बसों में अपनी सेवाएं दे चुके हैं और जनता से जुड़े हुए हैं। उनके नाम निम्नलिखित हैं:
- राजेश कुमार (करोल बाग)
- नीरज सिंह (पटेल नगर)
- सुनीता शर्मा (शालीमार बाग)
- मोहम्मद असलम (जामिया नगर)
- प्रियंका चौधरी (लक्ष्मी नगर)
- रवि शंकर (संगम विहार)
इन उम्मीदवारों का दावा है कि वे जनता के मुद्दों को लेकर पूरी गंभीरता और ईमानदारी के साथ काम करेंगे और दिल्ली को विकास की गति देंगे।
इन मुद्दे और प्राथमिकताएं को लेकर चुनाव लड़ेंगे मार्शल
बस मार्शल उम्मीदवारों ने अपने चुनावी एजेंडे में सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार को प्राथमिकता दी है। इनका कहना है कि बसों में तैनात रहने के दौरान उन्होंने न केवल सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को देखा, बल्कि अन्य कई समस्याओं को भी करीब से महसूस किया। जिसे अब वो दूर करने के इरादें से चुनावी मैदान में उतरे है ।
राजेश कुमार ने कहा, “दिल्ली की जनता सड़कों पर ट्रैफिक जाम, प्रदूषण, पानी की कमी और शिक्षा में सुधार की उम्मीद करती है। ये मुद्दे हमारे लिए प्राथमिकता होंगे। हम एक ऐसा मॉडल लाने की कोशिश करेंगे, जिसमें जनता की समस्याओं को सीधे तौर पर हल किया जा सके।
बस मार्शलों के चुनावी मैदान में उतरने पर क्या है जनता की राय?
बस मार्शलों के चुनावी मैदान में उतरने पर जनता की प्रतिक्रिया मिश्रित है। कुछ लोग इसे सकारात्मक पहल मानते हैं, तो कुछ इसे राजनीतिक चाल बताते हैं। शालीमार बाग की निवासी श्वेता अरोड़ा का कहना है, “बस मार्शल समाज के जरूरतमंद वर्गों के करीब रहते हैं। अगर ये ईमानदारी से काम करेंगे, तो बदलाव संभव है।” वहीं, कुछ लोगों का मानना है कि राजनीति में आने के बाद उनका मूल उद्देश्य कहीं खो सकता है।
बस मार्शलों की एंट्री से राजनीतिक दलों में बौखलाहट
दिल्ली के प्रमुख राजनीतिक दल, आम आदमी पार्टी (AAP) और भारतीय जनता पार्टी (BJP), इस पहल पर अलग-अलग राय रखते हैं। आप पार्टी के प्रवक्ता का कहना है, “बस मार्शलों का राजनीति में आना जनता के हित में है। इससे समाज के विभिन्न वर्गों को राजनीति में प्रतिनिधित्व मिलेगा।” वहीं, बीजेपी ने इसे “जनता की भावनाओं का राजनीतिकरण” करार दिया है।
बस मार्शलों के सामने होंगी बड़ी चुनौतियां और संभावनाएं
चुनावी मैदान में उतरने के बाद अब बस मार्शलों के सामने सबसे बड़ी चुनौती जनता का विश्वास जीतने की होगी। राजनीतिक अनुभव की कमी के बावजूद, उनका जमीनी स्तर पर जनता से जुड़ाव उनकी सबसे बड़ी ताकत हो सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बस मार्शल अपनी ईमानदारी और सेवा के जज़्बे को बरकरार रखते हैं, तो वे चुनावी राजनीति में अपनी जगह बना सकते हैं।