फिर गरमाया ऑक्सीजन किल्लत से मौत का मामला, 28 में से 15 राज्यों बोले, नहीं हुई ऑक्सीजन किल्लत से मौत

दिल्ली ब्यूरो
देश में एक बार फिर ऑक्सीजन से हुई मौत का मुद्दा गरमाने लगा है, दरअसल 20 जुलाई को मानसून सत्र के दौरान राज्यसभा में बीजेपी की राज्य मंत्री भारती प्रवीण पवार ने कहा था कि देश में कोरोनावायरस की दूसरी लहर के दौरान कोई भी मौत ऑक्सीजन किल्लत के चलते नहीं हुई है। जिसके बाद देश में बीजेपी सरकार की बेहद किरकिरी हुई थी। उसके बाद केंद्र सरकार की तरफ से सभी राज्यों को चिट्ठी लिखी गई और ऑक्सीजन की किल्लत के चलते मौत के आंकड़े पूछे गए थे। सरकार की तरफ से सभी राज्य सरकारों को 13 अगस्त तक मौत के आंकड़े जमा करने की बात कही गई थी। ऐसे में अब 28 राज्यों में से 15 राज्यों ने केंद्र सरकार को कोरोनावायरस की दूसरी लहर के दौरान ऑक्सीजन की किल्लत से हुई मौत के आंकड़े भेज दिए हैं। लेकिन ऐसे में हैरानी होती है कि जो जवाब केंद्र सरकार की तरफ से राज्यसभा में कहा गया था। वही जवाब 15 राज्यों की तरफ से भी कहा गया है। मतलब सभी 15 राज्यों ने कहा है कि उनके राज्य में ऑक्सीजन की किल्लत से कोई मौत नहीं हुई। हालांकि पंजाब की तरफ से चार लोगों की मौत के मामले में फिलहाल जांच की जा रही है। ऐसे में अब बड़ा सवाल यह खड़ा होता है कि क्या आखिरकार देश में ऑक्सीजन की कमी से मौत नहीं हुई है?
इन 15 राज्यों ने केंद्र सरकार को सौंपी रिपोर्ट
कोरोनावायरस के दौरान ऑक्सीजन किल्लत से हुई मौत के मामले में इन 15 राज्यों ने केंद्र सरकार को रिपोर्ट सौंपी है। जिसमें उत्तराखंड, असम, झारखंड, उड़ीसा, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, जम्मू कश्मीर और अरुणाचल प्रदेश समेत अन्य राज्य शामिल है। इन सभी राज्यों की तरफ से सरकार को कहा गया है कि उनके राज्य में ऑक्सीजन की किल्लत से कोई भी मौत नहीं हुई थी। इसके अलावा अभी फिलहाल उत्तर प्रदेश, राजस्थान, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, हरियाणा, पश्चिम बंगाल और केरल समेत कई राज्यों से जवाब नहीं मिल सके हैं।
दिल्ली सरकार ने बनाई थी जांच कमेटी, एलजी ने किया था भंग
कोरोना काल के दरमियान देश की राजधानी दिल्ली में ऑक्सीजन की किल्लत से कितने लोगों की मौत हुई। इसके लिए दिल्ली सरकार की तरफ से एक कमेटी का गठन किया गया था हालांकि उस कमेटी को दिल्ली के राज्यपाल ने भंग कर दिया था। इसके बाद एक बार फिर दिल्ली सरकार ने एलजी को कमेटी गठन करने की इजाजत मांगी है। उसके बाद दिल्ली सरकार इस मामले में पूरी जांच कर केंद्र सरकार को रिपोर्ट सौंपेगी। इन सब के बीच अब बड़ा सवाल यह भी खड़ा होता है कि आखिरकार जब दिल्ली सरकार ऑक्सीजन की किल्लत से हुई मौत के आंकड़ों की जांच करना चाहती हैं तो ऐसे में राज्यपाल को इस बात से क्या आपत्ति है कि वो कमेटी को भंग कर रहे हैं।
दिल्ली और यूपी हाईकोर्ट से सरकार को लग चुकी है फटकार
गौरतलब है कि ऑक्सीजन किल्लत के चलते दिल्ली और यूपी हाईकोर्ट से केंद्र सरकार को फटकार लग चुकी है। दिल्ली सरकार ने कोरोना काल के दरमियान केंद्र सरकार को सभी अस्पतालों में ऑक्सीजन पूर्ति के आदेश दिए थे। ऐसे में जब सरकार का रवैया ठीक नहीं था तो दोबारा दिल्ली हाईकोर्ट ने सरकार को फटकार लगाते हुए कहा था कि आप ऑक्सीजन चाहे कहीं से भी लाओ, या फिर चोरी करो या फिर इंपोर्ट करो लेकिन शहर में ऑक्सीजन की किल्लत से लोगों की मौत नहीं होनी चाहिए, उसकी पूर्ति की जानी चाहिए। वहीं दूसरी तरफ प्रयागराज हाई कोर्ट से भी राज्य सरकार को फटकार लगी थी। जिसमें कोर्ट ने कहा था की ऑक्सीजन की कमी से मर रहे लोगों की मौत किसी नरसंहार से कम नहीं है।