जन्मदिन विशेष: 48 के हुए सपा सुप्रीमो अखिलेश, जानें लवस्टोरी से लेकर राजनीति सफर तक की अहम बातें

लखनऊ ब्यूरो
उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव आज 48 साल के हो चुके है। इस मौके पर प्रदेश के मुखिया योगी आदित्यनाथ और पूर्व मुख्यमंत्री मायावती सहित कई नेताओं, कार्यकर्ताओं और प्रदेश वासियों ने अखिलेश यादव को जन्मदिन की बधाई दी और उनके उज्जवल भविष्य की कामना की है।
ऐसे में सफाई से निकलकर उत्तर प्रदेश की राजनीति में अपना परचम लहराने वाले सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव कि जिंदगी में कई उतार-चढ़ाव आए, लेकिन उन्होंने कठिन समय में भी कभी अपना संयम नहीं खोया। उनके जन्मदिवस के इस विशेष दिन पर आईये उनसे जुड़ी कुछ खास बातें आपको बताते हैं।
1973 को उत्तर प्रदेश के इटावा जिले के सैफई गांव में जन्में अखिलेश
अखिलेश यादव का जन्म 1 जुलाई 1973 को उत्तर प्रदेश के इटावा जिले के सैफई गांव में मुलायम सिंह यादव की पहली पत्नी मालती देवी के यहां हुआ। हालांकि अखिलेश यादव की परवरिश दादा-दादी के पास हुई क्योंकि पिता मुलायम सिंह यादव के राजनीतिक सफर में व्यस्तता कुछ ज्यादा थी। वही मां मालती की तबीयत अक्सर खराब रहा करती थी। लिहाजा अखिलेश का पालन-पोषण दादा-दादी के पास हुआ। इसके साथ ही अखिलेश ने शुरुआती पढ़ाई सैफई और इटावा में की, उसके बाद उन्होनें धौलपुर राजस्थान के मिलिट्री स्कूल में दाखिला लिया। जहां से उन्होंने नागरिक पर्यावरण में इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की। इसके अलावा मैसूर के एसजे कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से स्नातक किया और उसके बाद आगे की पढ़ाई के लिए आस्ट्रेलिया रवाना हो गए। जहां उन्होंने सिडनी विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल की।
इंजीनियरिंग करने के दौरान डिंपल से हुआ था प्यार
अखिलेश जब इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे थे, तब उनकी प्रेम कहानी शुरू हुई। उन दिनों अखिलेश की उम्र महज 21 साल की थी और उनकी प्रेमिका डिंपल की उम्र 17 साल थी। इन दोनों की लव स्टोरी किसी फिल्मी प्रेम कहानी से कम नहीं हैं। दोनों एक कॉमन फ्रेंड के जरिए पहली बार मिले थे। उसके बाद यह सिलसिला लगातार चलता गया और किसी ना किसी बहाने दोनों एक दूसरे से छुप छुप कर मिलते रहे। सिडनी जाने के बाद भी अखिलेश और डिंपल लगातार संपर्क में रहे। उस समय अखिलेश भारत से लगभग 9,740 किलोमीटर की दूर थे। बावजूद इसके हजारों किलोमिटर की दूरी दोनों के प्यार में दरार नहीं डाल सकी। अखिलेश सिडनी से डिंपल को लव लेटर लिखते और ग्रीटिंग कार्ड भेजते थे। दोनों के बीच ये सिलसिला लगभग 4 साल यानि तब तक चला जब तक कि अखिलेश अपनी पढ़ाई पूरी करके उत्तर प्रदेश वापस लौट नहीं आए। इस दौरान उन्होंने डिंपल से शादी करने का मन बना लिया था लेकिन कहा जाता है कि मुलायम सिंह यादव अखिलेश और डिंपल की शादी के खिलाफ थे। बावजूद इसके अखिलेश लगातार डिंपल से शादी करने की जिद पर अड़े हुए थे। आखिरकार तमाम दोस्तों के समझाने और कहने के बाद मुलायम सिंह यादव अखिलेश और डिंपल की शादी के लिए तैयार हो गए। जिसके बाद 24 नवंबर 1999 को दोनों शादी के बंधन में बंध गये। अखिलेश की पत्नी डिंपल उत्तराखंड की निवासी रहे लेफ्टिनेंट कर्नल एस सी रावत की बेटी है। कहा जाता है कि दोनों की शादी कराने में दिवंगत अमर सिंह का सबसे अहम योगदान रहा था। अभी तक 22 साल के सुहाने सफर में अखिलेश यादव और डिंपल एक खुशहाल जिंदगी बिता रहे हैं। दोनों के तीन बच्चे हैं, जिनका नाम अदिति, टीना और अर्जुन है। इसमें टीना और अर्जुन जुड़वा है। वही अखिलेश और डिंपल की जोड़ी प्रदेश में एक मिसाल के तौर पर देखी जाती है।
शादी के सालभर बाद ही अखिलेश बने सांसद
अखिलेश यादव शादी के एक साल बाद सन 2000 में पहली बार सांसद बनकर आए, जब उपचुनाव में उन्होंने कन्नौज सीट से जीत दर्ज की। इसके बाद 2004 से 2012 तक वो लगातार दो बार सांसद रहे। लेकिन 2012 में उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में सपा की जीत के बाद अखिलेश को मुलायम सिंह यादव ने 10 मार्च 2012 को समाजवादी पार्टी का नेता नियुक्त कर दिया। जिसके बाद 15 मार्च 2012 को अखिलेश यादव ने 38 साल की उम्र में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली और सबसे युवा मुख्यमंत्री होने का गौरव प्राप्त किया। इस बीच नियम अनुसार अखिलेश यादव ने मई 2012 में सांसद के पद से इस्तीफा दे दिया। 2017 में सपा के अप्रत्याशित हार के बाद अखिलेश यादव 2019 के लोकसभा चुनाव में एक बार फिर से मैदान में उतरे और अपने पारंपरिक सीट कन्नौज को छोड़कर उन्होंने आजमगढ़ से जीत दर्ज कर एक बार फिर से लोकसभा पहुंच गये। वही उनकी पत्नी डिंपल यादव भी कन्नौज से लगातार दो बार सांसद रह चुकी हैं। जब 2012 में सीएम बनने के बाद अखिलेश ने कन्नौज की सीट छोड़ी, तब डिंपल ने उपचुनाव में जीत दर्ज की और पहली बार लोकसभा पहुंची। उसके बाद 2014 लोकसभा चुनाव में बीजेपी की प्रचंड लहर होने के बावजूद भी डिंपल कन्नौज से दूसरी बार चुनाव जीतकर लोकसभा पहुंचने में कामयाब रहीं
हालांकि अब सत्ता से दूर अखिलेश परिवार एक बार फिर से 2022 के विधानसभा चुनाव में एक बेहतरीन परिणाम की उम्मीद कर रहा है। ताकि वे एक बार फिर से प्रदेश की सत्ता पर काबिज हो सकें। फिलहाल अखिलेश यादव को जन्मदिन की ढेर सारी शुभकामनाएं।